भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने पूर्व क्रिकेटरों के लिए पेंशन योजना संचालित करता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में योगदान देने वाले खिलाड़ियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सहयोग मिल सके। अक्सर क्रिकेट प्रशंसकों के मन में सवाल उठता है कि भारत के दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और सौरव गांगुली में से किसे सबसे ज्यादा पेंशन मिलती है। इसका जवाब BCCI की पेंशन नीति में छिपा है।
BCCI ने पूर्व खिलाड़ियों के लिए पेंशन योजना की शुरुआत वर्ष 2004 में की थी। समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए और वर्ष 2022 में पेंशन राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार खिलाड़ियों को उनके द्वारा खेले गए टेस्ट मैचों की संख्या के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में पेंशन दी जाती है।
सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए 200 टेस्ट मैच खेले हैं, जबकि वीरेंद्र सहवाग ने 104 और सौरव गांगुली ने 113 टेस्ट मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। तीनों खिलाड़ी BCCI की सर्वोच्च पेंशन श्रेणी में आते हैं। इसी वजह से इन तीनों को हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन मिलती है। यानी इनमें से किसी एक को दूसरों से अधिक पेंशन नहीं मिलती, बल्कि सभी को समान राशि प्रदान की जाती है।
सिर्फ यही नहीं, भारत के कई अन्य दिग्गज खिलाड़ी, जिन्होंने 25 या उससे अधिक टेस्ट मैच खेले हैं, वे भी इसी शीर्ष श्रेणी में शामिल हैं। इस सूची में सुनील गावस्कर, कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी और अन्य कई पूर्व क्रिकेटरों के नाम भी शामिल हैं। BCCI का उद्देश्य खिलाड़ियों के योगदान का सम्मान करना और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
BCCI की पेंशन योजना केवल पुरुष क्रिकेटरों तक सीमित नहीं है। घरेलू क्रिकेट खेलने वाले योग्य खिलाड़ियों, महिला क्रिकेटरों और अंपायरों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार पेंशन का लाभ दिया जाता है। बोर्ड समय-समय पर इस योजना की समीक्षा भी करता है, ताकि महंगाई और बदलती परिस्थितियों के अनुसार पूर्व खिलाड़ियों को बेहतर आर्थिक सहायता मिलती रहे।
इस तरह यदि सवाल यह है कि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और सौरव गांगुली में सबसे ज्यादा पेंशन किसे मिलती है, तो जवाब है—तीनों को बराबर। BCCI की मौजूदा पेंशन व्यवस्था के तहत तीनों दिग्गज हर महीने 70,000 रुपये की पेंशन प्राप्त करते हैं और सभी सर्वोच्च पेंशन स्लैब में शामिल हैं।
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