30 वर्षीय महिला की घटना ने बढ़ाई चिंता
पैरों में दर्द या सूजन को अक्सर लोग थकान, ज्यादा देर खड़े रहने या सामान्य कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही लक्षण शरीर में बनने वाले खतरनाक खून के थक्के यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) का संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है।
एक 30 वर्षीय महिला से जुड़ी घटना ने इस खतरे को फिर चर्चा में ला दिया है। ऐसे मामलों में पैरों में दर्द या सूजन के पीछे केवल मांसपेशियों की समस्या मानकर उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
क्या है डीप वेन थ्रोम्बोसिस?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस में शरीर की किसी गहरी नस में खून का थक्का बन जाता है। यह समस्या आमतौर पर पैरों में देखी जाती है। प्रभावित पैर में सूजन, दर्द, भारीपन, गर्माहट या त्वचा के रंग में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब यह थक्का टूटकर रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए। इससे पल्मोनरी एम्बोलिज्म हो सकता है, जो अचानक सांस फूलने और गंभीर स्थिति का कारण बन सकता है।
एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम भी हो सकता है कारण
कुछ लोगों में बार-बार खून के थक्के बनने के पीछे एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम (APS) जैसी ऑटोइम्यून बीमारी भी हो सकती है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ऐसे एंटीबॉडी बनाती है जो खून के ज्यादा आसानी से जमने का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इस स्थिति में पैरों में दर्द या सूजन के अलावा बार-बार रक्त के थक्के बनने जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं भी देखी जा सकती हैं।
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?
अगर एक पैर में अचानक सूजन, लगातार दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब इसके साथ अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर या बेहोशी जैसी समस्या भी हो।
ऐसे लक्षण फेफड़ों में रक्त का थक्का पहुंचने का संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
किन लोगों में बढ़ सकता है खतरा?
लंबे समय तक बैठे रहने, लंबी यात्रा, हाल की सर्जरी, लंबे समय तक बिस्तर पर रहने, कुछ हार्मोनल दवाओं, गर्भावस्था और पहले DVT हो चुके लोगों में रक्त के थक्के का खतरा बढ़ सकता है। कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, हर पैर दर्द या सूजन DVT नहीं होता। इसके कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
निष्कर्ष: पैरों में अचानक या असामान्य दर्द और सूजन को हल्के में न लें। समय पर जांच से खून के थक्के जैसी गंभीर समस्या की पहचान और इलाज संभव है।
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