शिंगल्स वैक्सीन का डबल फायदा? हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है कम


 शिंगल्स यानी हर्पीज जोस्टर से बचाव के लिए लगाई जाने वाली वैक्सीन को लेकर एक नई स्टडी ने उम्मीद की किरण दिखाई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, शिंगल्स की वैक्सीन लेने वाले लोगों में हार्ट डिजीज, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम देखा गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन परिणामों को वैक्सीन के सीधे कारण-प्रभाव के रूप में साबित करने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

नई स्टडी में क्या सामने आया?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब 70 हजार लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। शोध में खास तौर पर आधुनिक रिकॉम्बिनेंट शिंगल्स वैक्सीन Shingrix और पुरानी वैक्सीन के बीच अंतर देखा गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, Shingrix लेने वाले लोगों में सात साल की अवधि के दौरान कुल हृदय संबंधी बीमारी का बोझ करीब 9 फीसदी कम पाया गया। इस दौरान इस्केमिक हार्ट डिजीज का जोखिम करीब 10 फीसदी और हार्ट फेलियर का जोखिम करीब 12 फीसदी कम देखा गया। पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम भी करीब 12 फीसदी कम पाया गया।

एक अन्य विश्लेषण में वैक्सीन लेने के बाद शुरुआती साढ़े तीन वर्षों में हृदय संबंधी समस्याओं के निदान का जोखिम करीब 12 फीसदी कम पाया गया। हालांकि सात साल बाद यह अंतर कम होकर करीब 4 फीसदी रह गया।

शिंगल्स से हार्ट को क्या खतरा?

शिंगल्स चिकनपॉक्स पैदा करने वाले वैरिसेला-जोस्टर वायरस के दोबारा सक्रिय होने से होता है। यह बीमारी खासकर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है। संक्रमण के दौरान शरीर में सूजन और रक्त वाहिकाओं से जुड़े बदलाव हो सकते हैं, जो संभावित रूप से हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि शिंगल्स को रोकने से इस तरह की सूजन और उससे जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। एक संभावना यह भी है कि वैक्सीन प्रतिरक्षा प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डालती हो। हालांकि, इसका सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

क्या इसे हार्ट की वैक्सीन मान सकते हैं?

फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। नई स्टडी में वैक्सीन और कम हृदय जोखिम के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वैक्सीन सीधे तौर पर हार्ट अटैक या स्ट्रोक को रोकती है। शोधकर्ताओं ने भी इसके प्रभाव की पुष्टि के लिए रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत बताई है।

इसलिए शिंगल्स वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य अभी भी शिंगल्स और उसकी जटिलताओं से बचाव ही है। हार्ट और ब्रेन पर संभावित सुरक्षा इसका अतिरिक्त लाभ हो सकता है, जिसकी वैज्ञानिक पुष्टि के लिए आगे के अध्ययन जरूरी हैं।

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