शी जिनपिंग ने जनरल झाओ जोंगकी को हटाया, गलवान और डोकलाम के समय संभाल रहे थे कमान


 चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल झाओ जोंगकी को उनके महत्वपूर्ण पद से हटा दिया है। झाओ जोंगकी चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की वेस्टर्न थिएटर कमांड से जुड़े रहे हैं और भारत से लगी सीमा पर सैन्य गतिविधियों में उनकी अहम भूमिका रही थी। उनके कार्यकाल के दौरान डोकलाम विवाद और गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच तनाव देखने को मिला था।

झाओ जोंगकी को चीन के सैन्य और राजनीतिक ढांचे में प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका पद से हटाया जाना चीन की सैन्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

गलवान और डोकलाम से रहा है संबंध

जनरल झाओ जोंगकी उस समय PLA की वेस्टर्न थिएटर कमांड का नेतृत्व कर रहे थे, जब भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।

गलवान घटना के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात किए। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की गई।

'गलवान ऑपरेशन' को लेकर भी चर्चा

झाओ जोंगकी को लेकर यह भी दावा किया जाता रहा है कि गलवान में भारतीय सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई में उनकी भूमिका थी। कुछ रिपोर्टों में उनके नेतृत्व वाली कमांड को गलवान की सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा गया है। हालांकि, ऐसे दावों और ऑपरेशन से जुड़ी उनकी व्यक्तिगत भूमिका की पुष्टि के लिए आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी को आधार बनाना जरूरी है।

शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना में बदलाव

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सेना में वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं और सेना पर उनका मजबूत नियंत्रण माना जाता है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में बदलाव को चीन की सैन्य व्यवस्था में नेतृत्व और जवाबदेही से जुड़े व्यापक फेरबदल के संदर्भ में भी देखा जाता है।

भारत-चीन संबंधों पर क्या असर?

जनरल झाओ जोंगकी का भारत से लगी सीमा पर सैन्य कमान संभालने का अनुभव रहा है। इसलिए उनके हटने की खबर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि, उनके हटाए जाने का भारत-चीन संबंधों पर तत्काल क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल यह घटनाक्रम चीन के सैन्य नेतृत्व में हो रहे बदलावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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