संसद ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा के बाद मंगलवार (4 अगस्त) को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाना है, ताकि फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाई जा सके और नागरिक रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनें।
नए कानून के तहत देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम पहले से अधिक सख्त कर दिए गए हैं। यदि घटना के एक वर्ष से दो वर्ष के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं, दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही संभव होगा। पहले ऐसे मामलों में कार्यपालिका स्तर पर अनुमति मिल जाती थी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की कोशिशों पर अंकुश लगेगा। जन्म प्रमाणपत्र नागरिक की कानूनी पहचान का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसका उपयोग शिक्षा, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और अन्य कई सेवाओं में किया जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना इसकी प्राथमिकता है। नए प्रावधानों से लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि लंबे समय बाद किए जाने वाले पंजीकरण की कड़ी जांच होगी।
हालांकि, विपक्ष ने विधेयक को लेकर कुछ सवाल भी उठाए और सदन में हंगामे के बीच इसे पारित किया गया। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि यह संशोधन नागरिक रिकॉर्ड प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कानून लागू होने के बाद राज्यों को नए प्रावधानों के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव करने होंगे।
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