भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शामिल भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई अब बैंकिंग सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। नई तकनीक की मदद से बैंक कई प्रक्रियाओं को तेज और आसान बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में 10 हजार रुपये तक के चेक को एआई की सहायता से क्लियर करने की व्यवस्था शुरू की गई है। वहीं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज की मंजूरी में भी एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बैंकिंग सेक्टर में चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया को आमतौर पर कई चरणों से गुजरना पड़ता है। दस्तावेजों की जांच, हस्ताक्षर का सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में समय लग सकता है। एआई के इस्तेमाल से इन प्रक्रियाओं को अधिक स्वचालित और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर कम राशि वाले चेक के मामले में तकनीक की मदद से क्लियरेंस प्रक्रिया को आसान किया जा सकता है।
एसबीआई केवल चेक क्लियरेंस तक ही एआई के इस्तेमाल को सीमित नहीं रख रहा है। बैंक एमएसएमई कर्ज के लिए भी नई तकनीक आधारित अंडरराइटिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है। अंडरराइटिंग वह प्रक्रिया होती है, जिसमें बैंक किसी आवेदक की वित्तीय स्थिति, जोखिम और कर्ज चुकाने की क्षमता का आकलन करता है।
एआई आधारित सिस्टम बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर इस प्रक्रिया को अधिक तेज और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। इससे कर्ज आवेदन की जांच में लगने वाला समय कम हो सकता है और योग्य कारोबारियों को तेजी से ऋण मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे और मध्यम कारोबारों को समय पर वित्तीय सहायता मिलना उनके विस्तार और रोजगार सृजन के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे में एसबीआई की नई तकनीक आधारित पहल इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
हालांकि, बैंकिंग में एआई का बढ़ता इस्तेमाल डेटा सुरक्षा और मानवीय निगरानी की जरूरत को भी महत्वपूर्ण बनाता है। एआई सिस्टम प्रक्रियाओं को तेज कर सकते हैं, लेकिन अंतिम स्तर पर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और नियामकीय नियमों का पालन जरूरी रहेगा।
कुल मिलाकर, एसबीआई की यह पहल बैंकिंग सेक्टर में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की दिशा को दिखाती है। 10 हजार रुपये तक के चेक को एआई की मदद से क्लियर करने से लेकर एमएसएमई कर्ज की मंजूरी तक, नई तकनीक बैंकिंग प्रक्रियाओं को अधिक तेज, डिजिटल और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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