भारत तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की दुनिया में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। सरकार से लेकर बड़ी टेक कंपनियां तक एआई पर लगातार काम कर रही हैं, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने भारत की तैयारियों को लेकर अहम सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत एआई की रेस में शामिल तो है, लेकिन वास्तव में एआई तकनीक को विकसित करने और उसका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए जरूरी कौशल रखने वाले लोगों की संख्या अभी सीमित है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में केवल करीब 20 प्रतिशत लोग ही एआई, ऑटोमेशन और नई तकनीकों के लिए जरूरी स्किल्स विकसित करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहे हैं। यानी बड़ी आबादी अब भी तेजी से बदलती तकनीक और भविष्य की नौकरियों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
आज एआई का इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से काम करने के तरीकों को बदल रहा है। कई ऐसे काम, जो पहले पूरी तरह इंसानों द्वारा किए जाते थे, अब ऑटोमेशन और एआई की मदद से आसान हो रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों और युवाओं को नई तकनीक के अनुसार तैयार करने की है। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि केवल एआई टूल्स का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है। देश को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो एआई को समझने, विकसित करने और अपने काम में बेहतर तरीके से लागू करने की क्षमता रखते हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई कई पारंपरिक नौकरियों की प्रकृति बदल सकता है। हालांकि, इसके साथ ही नई नौकरियों और नए अवसरों के दरवाजे भी खुलेंगे। इसके लिए जरूरी होगा कि कर्मचारी और छात्र समय के साथ अपनी स्किल्स को अपग्रेड करें।
भारत के पास बड़ी युवा आबादी और मजबूत टेक्नोलॉजी सेक्टर जैसी बड़ी ताकत है। अगर देश में एआई से जुड़ी ट्रेनिंग, डिजिटल शिक्षा और अपस्किलिंग पर तेजी से काम किया जाता है, तो भारत केवल एआई की रेस में दौड़ने वाला देश नहीं, बल्कि भविष्य में इस तकनीकी दौड़ की 'ड्राइविंग सीट' पर भी पहुंच सकता है।
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