पंजाब में गन्ने की मिठास घटी, चीनी हुई कड़वी: 6 साल में 7.74% घटा उत्पादन, दाम 70 रुपये किलो तक पहुंचे


 पंजाब में गन्ने के उत्पादन में लगातार गिरावट का असर अब चीनी की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले छह वर्षों में राज्य में चीनी का उत्पादन 7.74 फीसदी तक घट गया है। उत्पादन कम होने के साथ ही बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। आम उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की जरूरत वाली चीनी अब पहले के मुकाबले काफी महंगी हो गई है।

करीब डेढ़ माह पहले पंजाब में चीनी 40 से 45 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही थी। अब इसकी कीमत बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इतनी कम अवधि में कीमतों में हुई इस तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर डाला है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बढ़ती कीमत चिंता का विषय बन गई है।

छह साल में उत्पादन में गिरावट

पंजाब में चीनी उत्पादन में आई कमी को कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजहों में से एक माना जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में राज्य का चीनी उत्पादन 7.74 फीसदी घटकर करीब 69.1 लाख टन रह गया है। गन्ने की उपलब्धता और उत्पादन में कमी का असर चीनी मिलों की क्षमता और बाजार में आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।

जमाखोरी पर सरकार की कार्रवाई

चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। प्रशासन की ओर से स्टॉक की जांच और अवैध भंडारण पर नजर रखी जा रही है। सरकार का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाना है।

हालांकि कार्रवाई के बावजूद चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। बाजार में कीमतों पर तत्काल नियंत्रण नहीं होने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती जा रही है।

त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता

आने वाले समय में त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में यदि उत्पादन और आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है। मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

पंजाब में चीनी की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर कृषि उत्पादन, बाजार आपूर्ति और उपभोक्ता कीमतों के बीच संबंध को सामने ला दिया है। सरकार के सामने अब चुनौती उत्पादन में गिरावट को रोकने के साथ-साथ जमाखोरी पर प्रभावी कार्रवाई कर बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की है।

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