24 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 200 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 50 ने 24,300 के स्तर को पार कर लिया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
बाजार में तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। इससे निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का भी असर
बाजार की नजर अमेरिका और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर भी रही। ईरान को लेकर अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की घोषणा के बीच कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों ने इन घटनाक्रमों के संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन किया।
हालांकि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बाजार के लिए जोखिम बना हुआ है। इसके बावजूद सोमवार के कारोबार में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बेहतर दिखाई दी।
वैश्विक बाजारों पर भी नजर
भारतीय बाजार में तेजी के बीच निवेशकों की नजर अमेरिका समेत प्रमुख वैश्विक बाजारों पर बनी हुई है। बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। ऐसे में निवेशक केंद्रीय बैंकों की नीतियों, ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों पर लगातार नजर रखेंगे।
किन सेक्टरों पर फोकस?
तेल की कीमतों में नरमी का फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जिनकी लागत ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होती है। वहीं बैंकिंग, वित्तीय और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ने से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी का 24,300 के ऊपर टिकना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के कारण आने वाले सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, 24 अगस्त का शुरुआती कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। सेंसेक्स की 200 अंकों से अधिक की बढ़त और निफ्टी के 24,300 के पार जाने से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। अब बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
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