राजस्थान की प्रदूषित नदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा 20 सूत्रीय स्थायी समाधान


 Supreme Court of India ने राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में लगातार बढ़ते प्रदूषण को गंभीर पर्यावरणीय संकट बताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता और नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार को 20 सूत्रीय स्थायी समाधान योजना तैयार कर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्षों से इन नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित जल छोड़े जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। अदालत ने चिंता जताई कि प्रदूषण का असर केवल नदी के पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की कृषि भूमि, भूजल, वन्यजीवों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को प्रभावी और दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे।

कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह ऐसी व्यापक योजना तैयार करे, जिसमें प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार, उद्योगों की नियमित निगरानी, पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन, दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई और नदियों के संरक्षण के लिए स्पष्ट समयबद्ध रणनीति शामिल हो। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केवल कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी जिम्मेदारी तय करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि स्वच्छ पर्यावरण प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकारों का दायित्व है कि वे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें। अदालत ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यदि उद्योग पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई में राजस्थान सरकार से 20 सूत्रीय स्थायी समाधान योजना और अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। माना जा रहा है कि अदालत की इस सख्ती के बाद राज्य में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की निगरानी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में तेजी आ सकती है। साथ ही, यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।

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