संसद का मानसून सत्र समाप्त: 12 विधेयक पारित, लोकसभा में 39 फीसदी रहा कामकाज


 संसद का मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हो गया। 19 दिनों तक चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला। हंगामे, नारेबाजी और विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, जिसका असर दोनों सदनों की उत्पादकता पर भी पड़ा।

मानसून सत्र के समापन के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया को संबोधित किया और सत्र के दौरान हुए कामकाज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तमाम बाधाओं और व्यवधानों के बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराया।

रिजिजू के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, लगातार हंगामे और विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा की कुल उत्पादकता करीब 39 फीसदी रही। कई दिनों तक सदन की कार्यवाही सामान्य ढंग से नहीं चल सकी और बार-बार स्थगन करना पड़ा।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार संसद में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थी। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश थी कि सदन सुचारू रूप से चले और महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक बहस हो, लेकिन बार-बार व्यवधान पैदा होने से संसद का कीमती समय प्रभावित हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि संसद देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और कानून बनाने का सबसे बड़ा मंच है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों और सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे सदन की कार्यवाही को बेहतर ढंग से चलने दें और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखें।

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के रवैये को संसद की कार्यवाही बाधित होने का कारण बताया। इस तरह पूरे सत्र के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।

19 दिनों के इस मानसून सत्र में भले ही कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए, लेकिन बार-बार के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही पर असर डाला। अब सत्र समाप्त होने के साथ ही सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे और आने वाले संसदीय सत्र की तैयारियों में जुटेंगे।

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