हर साल 23 जुलाई को World Sjögren’s Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को Sjögren’s Syndrome नामक ऑटोइम्यून बीमारी के प्रति जागरूक करना है। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से आंसू और लार बनाने वाली ग्रंथियों पर हमला करने लगती है। इसका सबसे आम लक्षण आंखों और मुंह का लगातार सूखना (Dry Eyes and Dry Mouth) है, लेकिन कई मामलों में यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।
क्या है Sjögren’s Syndrome?
Sjögren’s Syndrome एक ऑटोइम्यून रोग है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने ही स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगती है। यह बीमारी अकेले भी हो सकती है (Primary Sjögren’s) और रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) या ल्यूपस (Lupus) जैसी अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों के साथ भी हो सकती है।
इसके प्रमुख लक्षण
इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- आंखों में लगातार सूखापन, जलन या किरकिरापन
- मुंह का बार-बार सूखना
- निगलने या बोलने में परेशानी
- बार-बार प्यास लगना
- दांतों में जल्दी कैविटी होना
- थकान और कमजोरी
- जोड़ों में दर्द या सूजन
- त्वचा का सूखना
कुछ मरीजों में फेफड़े, किडनी, नसों और अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।
किन लोगों में अधिक जोखिम?
Sjögren’s Syndrome किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन:
- महिलाओं में इसका खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है।
- अक्सर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में इसकी पहचान होती है।
- जिन लोगों को पहले से कोई ऑटोइम्यून बीमारी है, उनमें इसका जोखिम बढ़ सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि आपकी आंखों या मुंह में सूखापन कई सप्ताह तक बना रहता है और सामान्य उपायों से राहत नहीं मिलती, या इसके साथ जोड़ों का दर्द, अत्यधिक थकान या अन्य लक्षण भी हों, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक या रूमेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित है।
जांच कैसे होती है?
डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर कई जांचों की सलाह दे सकते हैं, जैसे:
- आंखों में आंसू बनने की क्षमता की जांच (Schirmer Test)
- खून की जांच, जिसमें ऑटोएंटीबॉडी देखी जाती हैं
- लार ग्रंथियों की जांच
- जरूरत पड़ने पर अन्य विशेष परीक्षण
क्या इसका इलाज संभव है?
फिलहाल Sjögren’s Syndrome का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही उपचार और जीवनशैली अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार:
- कृत्रिम आंसू (Artificial Tears)
- मुंह की नमी बनाए रखने वाले उत्पाद
- पर्याप्त पानी पीने की सलाह
- कुछ मामलों में प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने वाली दवाएं
दे सकते हैं।
बचाव और देखभाल
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
- आंखों को धूल और तेज हवा से बचाएं।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
- नियमित रूप से दांतों और मुंह की सफाई करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा बंद या शुरू न करें।
निष्कर्ष
आंखों और मुंह का सूखापन हमेशा सामान्य समस्या नहीं होता। यदि यह लंबे समय तक बना रहे, तो यह Sjögren’s Syndrome जैसी ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और उचित इलाज से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। लगातार ड्राइनेस की समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ