रूस के बाद ऑस्ट्रेलिया भी Telegram पर सख्त, आतंकी सामग्री हटाने में विफल रहने पर करोड़ों के जुर्माने की चेतावनी


 इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram एक बार फिर वैश्विक नियामकों के निशाने पर आ गया है। रूस के बाद अब ऑस्ट्रेलिया ने भी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सुरक्षा नियामक (eSafety Commissioner) ने आरोप लगाया है कि Telegram ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित आतंकी और हिंसक चरमपंथी सामग्री को समय पर हटाने में लापरवाही बरती। इसी मामले को लेकर ऑस्ट्रेलियाई संघीय अदालत में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है और दोषी पाए जाने पर कंपनी पर करोड़ों रुपये के बराबर का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई नियामक के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो और सामग्री मौजूद थी, जो आतंकवादी घटनाओं और सामूहिक गोलीबारी से जुड़ी थी। दावा किया गया कि उपयोगकर्ताओं की शिकायतों और नोटिस मिलने के बावजूद Telegram ने कई मामलों में सामग्री हटाने या संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की। यदि अदालत नियामक के पक्ष में फैसला देती है, तो कंपनी पर 5.46 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (A$54.6 million) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

Telegram ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह प्लेटफॉर्म पर आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ से जुड़े कंटेंट के खिलाफ लगातार कार्रवाई करता है। कंपनी का दावा है कि उसने वर्ष 2026 के दौरान हजारों आतंकवाद से जुड़े चैनलों और समुदायों को हटाया है तथा वह अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब Telegram कई देशों में बढ़ती नियामकीय जांच का सामना कर रहा है। हाल ही में रूस में भी प्लेटफॉर्म और उसके संस्थापक पावेल ड्यूरोव को लेकर कानूनी कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। विभिन्न देशों की सरकारें सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से अपेक्षा कर रही हैं कि वे अवैध, हिंसक और आतंकवाद से जुड़े कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई करें तथा स्थानीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करें।

ऑस्ट्रेलिया की यह कार्रवाई वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों की जवाबदेही को लेकर सख्त होते रुख का संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और उसके फैसले पर दुनिया भर की निगाहें रहेंगी, क्योंकि इसका असर न केवल Telegram बल्कि अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों पर भी पड़ सकता है।

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