Supreme Court: सेवानिवृत्त जजों की सुविधाओं पर बनेंगे समान नियम, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए अहम निर्देश


 सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं में एकरूपता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह रिटायर्ड जजों को दी जाने वाली सुविधाओं और प्रोटोकॉल के लिए समान और स्पष्ट नियम तैयार करने पर विचार करे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न राज्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अलग-अलग तरह की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। कहीं उन्हें आवास, स्टाफ और सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलती हैं, तो कहीं इन व्यवस्थाओं में काफी अंतर देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर एक व्यापक नीति तैयार करने को कहा है। अदालत का मानना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होना आवश्यक है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अलग-अलग राज्यों में सुविधाओं में असमानता से भ्रम और प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। इसलिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए, जिसमें सुविधाओं, प्रोटोकॉल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समान मानक तय किए जा सकें।

इस मामले में केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने और आवश्यक नियमों के निर्माण पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नीति निर्धारण का अंतिम निर्णय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इस विषय पर एक समान ढांचा तैयार करना समय की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को न्यायिक व्यवस्था में संस्थागत सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि केंद्र सरकार इस संबंध में नई नीति तैयार करती है, तो देशभर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए सुविधाओं और प्रोटोकॉल को लेकर एकरूपता सुनिश्चित की जा सकेगी।

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