ISS पहुंचे भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन: एआई और मेडिकल रिसर्च पर रहेगा फोकस, जानें कब तक चलेगा मिशन


 भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। उन्होंने रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉसमोड्रोम से उड़ान भरी थी और सफलतापूर्वक ISS से जुड़ गए। यह उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा है, जो लगभग आठ महीने तक चलेगी।

अनिल मेनन इस मिशन के दौरान एक्सपेडिशन 74 और 75 का हिस्सा रहेंगे। उनका मुख्य फोकस वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों के परीक्षण और भविष्य के चंद्र एवं मंगल मिशनों की तैयारी पर रहेगा। मिशन के तहत वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), चिकित्सा विज्ञान और मानव स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोग करेंगे।

एआई और मेडिकल रिसर्च पर रहेगा जोर

नासा के अनुसार, अनिल मेनन अंतरिक्ष में ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अल्ट्रासाउंड तकनीक का परीक्षण करेंगे। इस तकनीक का उद्देश्य भविष्य में लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान पृथ्वी से लगातार चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता को कम करना है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो चंद्रमा और मंगल मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

इसके अलावा, वे माइक्रोग्रैविटी में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। इसमें रक्त प्रवाह, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, ऊतकों के विकास और नई बायोप्रिंटिंग तकनीकों से जुड़े प्रयोग शामिल हैं। इन शोधों से न केवल अंतरिक्ष यात्राओं को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि पृथ्वी पर चिकित्सा विज्ञान में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

कौन हैं अनिल मेनन?

अनिल मेनन एक आपातकालीन चिकित्सक, अमेरिकी स्पेस फोर्स के अधिकारी और नासा के अंतरिक्ष यात्री हैं। वे पहले स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर भी रह चुके हैं। भारतीय और यूक्रेनी मूल के परिवार से संबंध रखने वाले मेनन को 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री समूह में चुना गया था।

कब तक चलेगा मिशन?

यह मिशन लगभग आठ महीने तक चलेगा और अनिल मेनन के अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटने की संभावना है। इस दौरान वे ISS पर रहकर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी प्रदर्शनों में भाग लेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनिल मेनन का यह मिशन भविष्य की गहरे अंतरिक्ष की यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। साथ ही, इससे चिकित्सा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानव स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में भी नई उपलब्धियां हासिल होने की उम्मीद है।

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