एयरफोर्स में सपना बनकर रह गया 'मेक इन India'? LCA तेजस परियोजना कहां अटकी, जानें पूरी कहानी


 भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है। 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत स्वदेशी हथियारों और लड़ाकू विमानों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, लेकिन भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए तैयार किया गया लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस अब भी अपनी पूरी क्षमता के साथ बेड़े का हिस्सा नहीं बन पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तेजस परियोजना में देरी क्यों हो रही है और इसका वायुसेना पर क्या असर पड़ रहा है।

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान विदेशी मूल के हैं। इनमें मिग-29, सुखोई-30MKI, मिराज-2000, जगुआर और रफाल जैसे विमान शामिल हैं। इन विमानों ने वर्षों तक देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इनका विकास या मूल निर्माण विदेशों में हुआ है।

तेजस को भारत के पहले स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान के रूप में विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह लेना और देश की रक्षा जरूरतों को स्वदेशी तकनीक से पूरा करना था। इस परियोजना से उम्मीद थी कि भारत रक्षा आयात पर निर्भरता कम करेगा और घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को नई मजबूती मिलेगी।

हालांकि, परियोजना को तकनीकी चुनौतियों, परीक्षण प्रक्रियाओं, उत्पादन क्षमता की सीमाओं और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति में देरी जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन कारणों से तेजस की डिलीवरी अपेक्षित गति से नहीं हो सकी। नतीजतन, वायुसेना को अपनी तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भर रहना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस परियोजना में हुई देरी ने भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या पर भी असर डाला है। समय पर नए विमान नहीं मिलने के कारण पुराने विमानों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखना पड़ा, जिससे आधुनिकीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

इसके बावजूद तेजस कार्यक्रम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हाल के वर्षों में उत्पादन बढ़ाने, उन्नत संस्करण विकसित करने और स्वदेशी तकनीक का दायरा बढ़ाने के प्रयास तेज किए गए हैं। यदि उत्पादन और आपूर्ति की गति में सुधार होता है, तो आने वाले वर्षों में तेजस भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ भारत के रक्षा निर्यात को भी नई दिशा दे सकता है।

ऐसे में LCA तेजस केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान की सबसे अहम रक्षा परियोजनाओं में से एक है। इसकी सफलता न केवल वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक रक्षा उद्योग में भारत की स्थिति भी मजबूत करेगी।

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