India-Japan Summit 2026: भारत-जापान के बीच रक्षा क्षेत्र की पहली संयुक्त परियोजना, PM मोदी ने गिनाए सामरिक फायदे


 भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र की पहली संयुक्त विकास (Joint Development) परियोजना पर समझौता किया है। इस ऐतिहासिक पहल को दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह समझौता न केवल दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और जापान के संबंध अब केवल आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश रक्षा तकनीक, उन्नत विनिर्माण और सामरिक क्षेत्रों में भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने इस रक्षा परियोजना को दोनों देशों की साझेदारी का नया अध्याय बताया।

इस संयुक्त परियोजना के तहत अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास और उत्पादन में सहयोग किया जाएगा। इससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता मजबूत होगी और 'मेक इन इंडिया' तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी गति मिलेगी। साथ ही, दोनों देशों के बीच तकनीकी विशेषज्ञता और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) को भी प्राथमिकता दी। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को मजबूत करने, सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग बढ़ाने और उभरती प्रौद्योगिकियों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इनोवेशन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने की घोषणा भी की गई।

ऊर्जा क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। भारत और जापान ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 1,000 बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के नए स्रोत विकसित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-जापान की यह साझेदारी ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीक, आर्थिक सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी दोनों देशों को दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ दे सकती है।

इस शिखर सम्मेलन ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत और जापान अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रक्षा क्षेत्र की पहली संयुक्त विकास परियोजना से लेकर एआई, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा तक, दोनों देशों का सहयोग आने वाले वर्षों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा सकता है।

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