Hepatitis Risk: लिवर को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकता है हेपेटाइटिस संक्रमण, जानें कब करानी चाहिए जांच


 हेपेटाइटिस (Hepatitis) एक ऐसी बीमारी है जो लिवर में सूजन पैदा करती है और समय पर इलाज न मिलने पर धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। चिंता की बात यह है कि कई मामलों में शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी वजह से इसे अक्सर "साइलेंट लिवर डिजीज" भी कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और उपचार से हेपेटाइटिस के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

क्या है हेपेटाइटिस?

हेपेटाइटिस लिवर की सूजन है, जो मुख्य रूप से वायरस (हेपेटाइटिस A, B, C, D और E), अत्यधिक शराब के सेवन, कुछ दवाओं या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण हो सकती है। इनमें हेपेटाइटिस B और C लंबे समय तक बिना लक्षण के रह सकते हैं और बाद में लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर का कारण बन सकते हैं।

हेपेटाइटिस के संभावित लक्षण

शुरुआती दौर में कई लोगों को कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं:

  • लगातार थकान और कमजोरी
  • भूख कम लगना
  • मतली या उल्टी
  • पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में दर्द
  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
  • गहरे रंग का पेशाब
  • हल्के रंग का मल
  • बुखार या शरीर में दर्द

कब करानी चाहिए जांच?

डॉक्टरों के अनुसार, निम्न परिस्थितियों में हेपेटाइटिस की जांच कराने पर विचार करना चाहिए:

  • लंबे समय से थकान या पीलिया जैसे लक्षण हों।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) की रिपोर्ट असामान्य आए।
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों।
  • बिना जांचे गए रक्त का ट्रांसफ्यूजन कराया हो (विशेषकर पुराने समय में)।
  • इंजेक्शन या सुई साझा करने का इतिहास हो।
  • स्वास्थ्यकर्मी या संक्रमण के अधिक जोखिम वाले पेशे में हों।
  • गर्भावस्था के दौरान (विशेष रूप से हेपेटाइटिस B की स्क्रीनिंग)।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार जोखिम वाले अन्य समूहों में शामिल हों।

कैसे होती है जांच?

हेपेटाइटिस की पुष्टि के लिए डॉक्टर निम्न जांचें कराने की सलाह दे सकते हैं:

  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
  • हेपेटाइटिस B और C की ब्लड स्क्रीनिंग
  • वायरल लोड टेस्ट (जरूरत पड़ने पर)
  • लिवर का अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच

बचाव कैसे करें?

  • हेपेटाइटिस A और B का टीका लगवाएं (जहां उपयुक्त हो)।
  • केवल सुरक्षित और स्टरलाइज्ड सुई का इस्तेमाल करें।
  • जांचा हुआ रक्त ही चढ़वाएं।
  • व्यक्तिगत सामान जैसे रेजर और टूथब्रश साझा न करें।
  • सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं।
  • स्वच्छ भोजन और साफ पानी का सेवन करें।

हेपेटाइटिस का समय पर पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती चरण में उपचार शुरू होने पर लिवर को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। यदि आपको लंबे समय से थकान, पीलिया या लिवर से जुड़े अन्य लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच जरूर कराएं।

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