हार्ट अटैक को अक्सर सीने में तेज दर्द से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कई मामलों में इसके शुरुआती लक्षण पेट की सामान्य परेशानी जैसे गैस, अपच या एसिडिटी से मिलते-जुलते हो सकते हैं। यही वजह है कि कई लोग इन संकेतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से हृदय को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में हार्ट अटैक की शुरुआत पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन, जलन, दबाव या दर्द के रूप में हो सकती है। यह दर्द कई बार गैस या अपच जैसा महसूस होता है, इसलिए मरीज अक्सर घरेलू उपाय या गैस की दवा लेकर राहत पाने की कोशिश करते हैं। यदि यह तकलीफ बार-बार हो रही हो या इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हार्ट अटैक के दौरान सीने में दबाव, जकड़न या दर्द के अलावा दर्द बाएं हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। इसके साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, मतली, उल्टी, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह के मरीजों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण सामान्य से अलग होते हैं, इसलिए इनके प्रति अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है।
यदि किसी व्यक्ति को पेट में दर्द या जलन के साथ सीने में दबाव, सांस लेने में कठिनाई या अचानक पसीना आने जैसी परेशानी महसूस हो, तो इसे केवल गैस या अपच मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना सबसे सुरक्षित कदम है। हार्ट अटैक के इलाज में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, शराब का सीमित सेवन, तनाव पर नियंत्रण तथा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना हृदय को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।
ध्यान रखें कि पेट की हर तकलीफ हार्ट अटैक का संकेत नहीं होती, लेकिन यदि लक्षण असामान्य हों, लगातार बने रहें या अन्य चेतावनी संकेतों के साथ दिखाई दें, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। सही समय पर पहचान और इलाज ही हार्ट अटैक से होने वाली गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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