अमेरिका में H-1B वीजा पर तीन साल की रोक का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें


 अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के लिए सबसे लोकप्रिय H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए एक नए विधेयक (बिल) में अगले तीन वर्षों तक नए H-1B वीजा जारी करने पर रोक लगाने और पहले से लागू 1 लाख डॉलर के अतिरिक्त शुल्क को कानूनी मान्यता देने की मांग की गई है। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय आईटी पेशेवरों और उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो बड़ी संख्या में H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं।

H-1B वीजा अमेरिका का एक विशेष गैर-आप्रवासी (Non-Immigrant) वीजा है, जिसके माध्यम से विदेशी विशेषज्ञों को तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, वित्त और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में काम करने की अनुमति मिलती है। भारत इस वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है और हर साल जारी होने वाले H-1B वीजा का बड़ा हिस्सा भारतीय पेशेवरों को मिलता है।

सीनेट में पेश प्रस्ताव के अनुसार, अगले तीन वर्षों तक नए H-1B वीजा आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा, पहले से प्रस्तावित 1 लाख डॉलर शुल्क को कानूनी रूप से लागू करने की बात कही गई है। समर्थकों का तर्क है कि इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे और कंपनियां स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देंगी।

हालांकि, इस प्रस्ताव का तकनीकी उद्योग और वैश्विक कंपनियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियां कुशल विदेशी कर्मचारियों पर निर्भर हैं। भारतीय आईटी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के लिए H-1B वीजा का बड़े पैमाने पर उपयोग करती हैं। ऐसे में यदि नए वीजा पर रोक लगती है, तो कंपनियों की भर्ती रणनीति, प्रोजेक्ट डिलीवरी और वैश्विक कारोबार प्रभावित हो सकता है।

भारतीय पेशेवरों के लिए यह स्थिति नौकरी के अवसरों में कमी, अमेरिका में करियर की योजनाओं में देरी और वीजा प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बढ़ा सकती है। वहीं, जो लोग पहले से H-1B वीजा पर अमेरिका में कार्यरत हैं, उनके लिए तत्काल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है, लेकिन भविष्य में वीजा विस्तार और नई भर्ती को लेकर नियमों में बदलाव संभव है।

फिलहाल यह केवल एक विधायी प्रस्ताव है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूरी तथा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि H-1B वीजा पर वास्तव में तीन साल की रोक लगेगी या नहीं। फिर भी, इस प्रस्ताव ने भारतीय आईटी उद्योग, छात्रों और अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों पेशेवरों के बीच चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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