बारिश और गर्मी के मौसम में बढ़ी हुई उमस (Humidity) कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। अत्यधिक उमस न केवल बेचैनी और थकान बढ़ाती है, बल्कि कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर (BP) से जुड़ी समस्याओं को भी प्रभावित कर सकती है।
क्या उमस और BP के बीच कोई संबंध है?
उमस बढ़ने पर शरीर को अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अधिक नमी के कारण पसीना आसानी से नहीं सूखता, जिससे शरीर को ठंडा होने में दिक्कत होती है। इसके परिणामस्वरूप:
- दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।
- डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
- कुछ लोगों में BP ऊपर-नीचे हो सकता है।
- चक्कर, थकान और बेचैनी महसूस हो सकती है।
हालांकि, सभी लोगों में उमस सीधे तौर पर हाई BP नहीं बढ़ाती। इसका प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- बुजुर्ग
- हृदय रोग से पीड़ित लोग
- डायबिटीज के मरीज
- वे लोग जो BP या पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं (Diuretics) लेते हैं
उमस के दौरान क्या लक्षण दिख सकते हैं?
- सिरदर्द
- अत्यधिक पसीना
- कमजोरी और थकान
- चक्कर आना
- सांस फूलना
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना
यदि इन लक्षणों के साथ BP में असामान्य बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- बहुत ज्यादा गर्म और उमस वाले समय में बाहर निकलने से बचें।
- हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
- घर में अच्छी वेंटिलेशन और ठंडक बनाए रखें।
- यदि आप BP के मरीज हैं, तो नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करें।
क्या कहती है रिसर्च?
कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि अत्यधिक गर्मी और उमस हृदय और रक्तचाप पर असर डाल सकती है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति-विशेष पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए यदि आपको पहले से हाई BP की समस्या है, तो मौसम में बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहतर है।
निष्कर्ष: ज्यादा उमस शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है और कुछ लोगों में BP से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती है। पर्याप्त पानी, सही खानपान और नियमित निगरानी से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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