मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार एक बार फिर दबाव में आ गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से बाब अल-मंदेब जलमार्ग को बंद करने की चेतावनी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। यदि इन दोनों अहम समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से की आपूर्ति इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में किसी भी तरह की रुकावट से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर देश की आयात लागत पर पड़ेगा। तेल कंपनियों का खर्च बढ़ने से भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
भारत का निर्यात क्षेत्र भी इस संकट से प्रभावित हो सकता है। यदि लाल सागर का मार्ग बाधित होता है, तो यूरोप और पश्चिम एशिया जाने वाले जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ेंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक नहीं चलता और समुद्री मार्ग सामान्य बने रहते हैं, तो ईंधन कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से बचा जा सकता है। भारत ने हाल के वर्षों में तेल आयात के स्रोतों में विविधता भी बढ़ाई है, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हुआ है।
फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यदि लाल सागर और होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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