मनमोहन सिंह को कोयला घोटाला मामले में मिली क्लीन चिट, जानिए क्या थे आरोप और जांच में क्या निकला?


 देश के चर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनके निधन के लगभग 19 महीने बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने विशेष अदालत से उनके खिलाफ दर्ज मामले को बंद करने की अनुमति मांगी है। एजेंसी का कहना है कि लंबी जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने किसी प्रकार की आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग में भूमिका निभाई थी।

यह मामला उस समय का है जब वर्ष 2005 से 2009 के बीच कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार स्वयं प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास था। आरोप लगाया गया था कि इस दौरान कुछ निजी कंपनियों को नियमों का उल्लंघन करते हुए कोयला ब्लॉकों का आवंटन किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसी क्रम में कई मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और कुछ मामलों में तत्कालीन अधिकारियों तथा कंपनियों के खिलाफ आरोप भी तय किए गए।

जांच के दौरान सीबीआई ने आवंटन प्रक्रिया से जुड़े सरकारी दस्तावेज, मंत्रालय की फाइलें, अधिकारियों के बयान और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड का विस्तार से परीक्षण किया। एजेंसी ने यह भी जांचा कि क्या आवंटन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री कार्यालय या तत्कालीन प्रधानमंत्री की ओर से किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप किया गया था। हालांकि जांच में ऐसा कोई प्रत्यक्ष या विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे डॉ. मनमोहन सिंह की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सके।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि उपलब्ध साक्ष्य किसी भी आपराधिक मंशा, साजिश या भ्रष्टाचार के आरोप की पुष्टि नहीं करते। इसी आधार पर एजेंसी ने पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने और मामला बंद करने का अनुरोध किया है। चूंकि डॉ. मनमोहन सिंह का पहले ही निधन हो चुका है, इसलिए उनके विरुद्ध आगे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई भी संभव नहीं है। ऐसे में एजेंसी ने न्यायालय से औपचारिक रूप से केस बंद करने की मांग की।

कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में विभिन्न कंपनियों, अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे चले, जबकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां और साक्ष्य अलग रहे। पूर्व प्रधानमंत्री से जुड़े मामले में सीबीआई की अंतिम जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अब इस मामले पर अंतिम निर्णय विशेष अदालत द्वारा लिया जाएगा।

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