मनीला में आयोजित क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर स्वतंत्र, समावेशी और खुले हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री स्थिरता को और मजबूत करना था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और समृद्धि वैश्विक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि भारत एक ऐसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करता है, जहां सभी देशों को समान अवसर मिलें और समुद्री मार्ग स्वतंत्र एवं सुरक्षित बने रहें।
बैठक के दौरान जयशंकर ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बनाए रखने में आसियान की भूमिका बेहद अहम है और भारत आसियान-केंद्रित क्षेत्रीय ढांचे का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड और आसियान के बीच सहयोग बढ़ाने से क्षेत्र में विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा को नई दिशा मिलेगी।
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, उभरती प्रौद्योगिकियों, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। इसके अलावा, बैठक में स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में क्वाड देशों का एकजुट होकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के समर्थन में आगे आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत ने स्पष्ट किया कि वह एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। यह बैठक क्षेत्रीय सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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