सरकार ने स्थानीय निकाय व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद संबंधित जिलों में प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने और विकास योजनाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आने को सुनिश्चित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इसी तर्ज पर जल्द ही ब्लॉक प्रमुखों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने तक जिला पंचायतों के प्रशासनिक और वित्तीय कार्य प्रशासकों की निगरानी में संचालित होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना और प्रशासनिक शून्यता की स्थिति से बचना बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने या नई व्यवस्थाओं के लागू होने तक प्रशासकों को विभिन्न योजनाओं की समीक्षा, बजट संबंधी निर्णय और आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। इससे सड़क, पेयजल, ग्रामीण विकास और अन्य जनहित से जुड़े कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
अब सरकार की नजर ब्लॉक स्तर की संस्थाओं पर भी है। माना जा रहा है कि ब्लॉक प्रमुखों के लिए भी जल्द इसी प्रकार की अंतरिम व्यवस्था लागू की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ब्लॉक स्तर पर भी विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जाएगा।
इस फैसले के राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मायने निकाले जा रहे हैं। एक ओर सरकार इसे प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इस पर सवाल भी उठा सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक जरूरतों और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से स्थानीय निकायों में प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी और विकास परियोजनाओं में देरी की संभावना कम होगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ब्लॉक प्रमुखों के संबंध में सरकार कब तक नया आदेश जारी करती है और उसका स्थानीय प्रशासन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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