पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नागरिक की मौत का मामला अब गंभीर कूटनीतिक मुद्दा बन गया है। भारतीय नाविक की मौत और अन्य भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के उप मिशन प्रमुख (डीसीएम) मोहम्मद जवाद हुसैनी को तलब किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और ईरानी पक्ष से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।
मंगलवार को ईरानी राजनयिक मोहम्मद जवाद हुसैनी नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय पहुंचे, जहां भारतीय अधिकारियों ने उनसे इस घटना पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाएगा।
दरअसल, सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य भारतीय नागरिक घायल हो गए थे। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हाल के दिनों में यहां सुरक्षा स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। भारतीय दूतावास भी स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और घायल भारतीयों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित करने की बात कही है कि मृतक भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। भारत, जो इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है, स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
भारतीय सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी और इस मामले में सभी आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।

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