योग और ध्यान को लंबे समय से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता रहा है। अब इस दिशा में एक नई रिसर्च ने भी उम्मीद जगाई है। देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स (AIIMS) की एक हालिया स्टडी में पाया गया है कि योग निद्रा की नियमित प्रैक्टिस बिना मिर्गी (Non-Epileptic Seizures) के पड़ने वाले दौरों से जूझ रहे मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक तनाव कम करने, मानसिक संतुलन बेहतर बनाने और ऐसे दौरों की आवृत्ति घटाने में मददगार हो सकती है।
बिना मिर्गी के पड़ने वाले दौरे, जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में Psychogenic Non-Epileptic Seizures (PNES) कहा जाता है, मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण नहीं होते। ये अक्सर मानसिक तनाव, भावनात्मक आघात, चिंता या अवसाद जैसी मनोवैज्ञानिक स्थितियों से जुड़े होते हैं। कई बार इनके लक्षण मिर्गी के दौरे जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनका इलाज और कारण अलग होते हैं।
एम्स की रिसर्च में ऐसे मरीजों को योग निद्रा का अभ्यास कराया गया। अध्ययन के दौरान पाया गया कि नियमित रूप से योग निद्रा करने वाले प्रतिभागियों में तनाव का स्तर कम हुआ और दौरे आने की घटनाओं में भी कमी देखी गई। इसके साथ ही उनकी नींद की गुणवत्ता, मानसिक शांति और जीवन की समग्र गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि योग निद्रा पारंपरिक इलाज के साथ एक सहायक थेरेपी के रूप में उपयोगी हो सकती है।
आखिर योग निद्रा क्या है? यह योग की एक विशेष रिलैक्सेशन तकनीक है, जिसमें व्यक्ति आरामदायक स्थिति में लेटकर आंखें बंद करता है और प्रशिक्षक या ऑडियो के निर्देशों का पालन करता है। इस दौरान सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, शरीर के अलग-अलग हिस्सों को क्रमवार शिथिल किया जाता है और मन को गहरे विश्राम की अवस्था में ले जाया जाता है। इसे अक्सर "योगिक स्लीप" भी कहा जाता है, हालांकि इसमें व्यक्ति पूरी तरह सोता नहीं है बल्कि जागरूक विश्राम की स्थिति में रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि योग निद्रा तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसे किसी भी बीमारी का पूर्ण इलाज नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ रहे हैं, तो सबसे पहले न्यूरोलॉजिस्ट या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा और मनोवैज्ञानिक उपचार के साथ योग निद्रा जैसी तकनीकों को अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। एम्स की यह रिसर्च इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, लेकिन इसके प्रभावों की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी।
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