मानसिक स्वास्थ्य में कई विकसित देश पिछड़े, डॉक्टरों से पहले AI की मदद ले रहे मरीज; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा


 मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दुनिया के कई विकसित देशों में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी और इलाज में लंबा इंतजार मरीजों को नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर कर रहा है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में लोग शुरुआती सलाह और जानकारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेने लगे हैं।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई विकसित देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और काउंसलर्स की उपलब्धता उसी गति से नहीं बढ़ पाई है। कई मरीजों को अपॉइंटमेंट के लिए हफ्तों या महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में AI आधारित टूल्स शुरुआती मार्गदर्शन और सामान्य जानकारी देने का एक आसान विकल्प बनकर उभरे हैं।

AI चैटबॉट्स की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह भी है कि ये 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं और उपयोगकर्ता बिना किसी झिझक के अपनी भावनाएं या समस्याएं साझा कर सकते हैं। कुछ लोग तनाव, चिंता, नींद की समस्या और भावनात्मक परेशानियों को समझने के लिए AI की मदद लेते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि AI केवल सामान्य जानकारी और शुरुआती सहायता दे सकता है, यह प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक का विकल्प नहीं है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार अवसाद, घबराहट, आत्महत्या के विचार, गंभीर चिंता या दैनिक जीवन पर असर डालने वाली मानसिक समस्याएं हों, तो उसे तुरंत योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। AI ऐसी गंभीर स्थितियों का निदान या उपचार नहीं कर सकता।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भविष्य में AI मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायक भूमिका निभा सकता है। यह मरीजों की शुरुआती स्क्रीनिंग, सामान्य जानकारी, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और डॉक्टरों तक पहुंच आसान बनाने में उपयोगी हो सकता है। लेकिन अंतिम निर्णय, निदान और इलाज हमेशा प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ की निगरानी में ही होना चाहिए।

कुल मिलाकर, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे डॉक्टरों का विकल्प नहीं बल्कि एक सहायक तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए। विकसित देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा।

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