कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के लिए AI से कराई निगरानी, बिना सहमति जुटाया डेटा


 एक कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। आरोप है कि कर्मचारियों की स्पष्ट सहमति लिए बिना उनके कामकाज, ऑनलाइन गतिविधियों और प्रदर्शन से जुड़ा डेटा एकत्र किया गया और बाद में इसी जानकारी का उपयोग नौकरी से निकालने के फैसले में किया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, AI टूल्स की मदद से कर्मचारियों के लॉगिन समय, कंप्यूटर उपयोग, मीटिंग में भागीदारी, ईमेल गतिविधियों और कार्यक्षमता से जुड़े विभिन्न पैमानों की निगरानी की गई। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें इस तरह की निगरानी के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।

इस मामले ने कार्यस्थल पर निजता और AI के उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रकार की डिजिटल निगरानी के लिए कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से सूचित करना और उनकी सहमति लेना बेहद जरूरी है। बिना पारदर्शिता के AI आधारित निगरानी कर्मचारियों के गोपनीयता अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह साबित होता है कि कर्मचारियों की अनुमति के बिना डेटा एकत्र किया गया और उसका इस्तेमाल रोजगार संबंधी फैसलों में किया गया, तो संबंधित कंपनी को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कई देशों में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता कानून इस तरह की गतिविधियों पर सख्त नियम लागू करते हैं।

हाल के वर्षों में कंपनियों द्वारा AI आधारित टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है that AI का इस्तेमाल पारदर्शी, जिम्मेदार और कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करते हुए किया जाना चाहिए।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि कार्यस्थल पर तकनीक और कर्मचारियों की निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में AI मॉनिटरिंग और डेटा गोपनीयता से जुड़े नियमों को और सख्त किए जाने की मांग तेज हो सकती है।

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