8वां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर पर पहली बार बोली मोदी सरकार, संसद में दिया बड़ा जवाब


 8वें वेतन आयोग को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार संसद में फिटमेंट फैक्टर के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। राज्यसभा में सांसद जावेद अली द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच लंबे समय से यह उत्सुकता बनी हुई थी कि 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर कितना हो सकता है और इससे वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी।

फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है, जिसके जरिए कर्मचारियों के मौजूदा मूल वेतन (Basic Pay) को नए वेतनमान में बदला जाता है। यही कारण है कि वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक माना जाता है। कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों की ओर से समय-समय पर इसे बढ़ाने की मांग भी उठाई जाती रही है।

राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने कहा कि फिलहाल 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में किसी विशेष आंकड़े या प्रतिशत को मंजूरी नहीं दी गई है। यानी फिलहाल सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चल रही फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया कि वेतन आयोग से जुड़े सभी पहलुओं पर उचित समय पर विचार किया जाएगा और आयोग की प्रक्रिया के अनुसार आगे निर्णय लिए जाएंगे। इससे यह साफ हो गया है कि फिलहाल कर्मचारियों को फिटमेंट फैक्टर को लेकर किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि नए वेतन आयोग की सिफारिशों से वेतन, भत्तों और पेंशन में सुधार होगा। हालांकि सरकार की ओर से संसद में दिए गए जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि अभी किसी भी संभावित फिटमेंट फैक्टर या वेतन वृद्धि के दावे को अंतिम नहीं माना जा सकता।

ऐसे में कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे केवल सरकार की आधिकारिक घोषणाओं और संसद में दिए गए बयानों पर ही भरोसा करें। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी आगे की प्रक्रिया और सिफारिशों पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आय तथा भविष्य की वित्तीय योजना पर पड़ने वाला है।

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