ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त हमले में मौत के बाद अब करीब 131 दिन बाद उनके अंतिम संस्कार और सुपुर्द-ए-खाक की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। युद्ध, सुरक्षा कारणों और राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उनकी अंतिम विदाई में लंबी देरी हुई। अब 4 जुलाई से 9 जुलाई तक छह दिनों में पांच शहरों से गुजरने वाली करीब 3000 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा का कार्यक्रम तय किया गया है।
आखिर 131 दिन की देरी क्यों हुई?
सामान्य तौर पर इस्लाम में किसी व्यक्ति को निधन के तुरंत बाद दफनाने की परंपरा है। लेकिन खामेनेई के मामले में हालात अलग रहे। उनकी मौत ऐसे समय हुई जब ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच संघर्ष चरम पर था। सुरक्षा जोखिम, लगातार सैन्य तनाव, युद्धविराम की कोशिशें और राजकीय स्तर पर अंतिम संस्कार की व्यापक तैयारियों के कारण कार्यक्रम को कई बार टालना पड़ा।
कैसी होगी अंतिम यात्रा?
ईरानी सरकार ने खामेनेई की अंतिम यात्रा को राष्ट्रीय स्तर का राजकीय कार्यक्रम बनाया है। इसकी शुरुआत 4 जुलाई को तेहरान में होगी, जहां हजारों लोगों की मौजूदगी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसके बाद पार्थिव शरीर को अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों में ले जाया जाएगा। पूरी यात्रा करीब 3000 किलोमीटर की होगी और 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
क्या नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई होंगे शामिल?
खामेनेई के बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अंतिम यात्रा में शामिल होने को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जाता है कि 28 फरवरी के हमले में वे भी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी वजह से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर अब भी अटकलें जारी हैं।
क्यों अहम है यह अंतिम संस्कार?
विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अंतिम यात्रा के दौरान दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इसके जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी राजनीतिक एकजुटता और शक्ति का संदेश देने की भी कोशिश करेगा।
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