ईरान-इजरायल तनाव से भारत ने लिया सबक, 30 दिन का LPG इमरजेंसी रिजर्व बनाएगा देश; होर्मुज बंद होने पर भी नहीं होगी बड़ी दिक्कत


 पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष से मिले अनुभव के बाद भारत ने एलपीजी (LPG) आपूर्ति को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। सरकार अब देश में 30 दिनों का एलपीजी इमरजेंसी रिजर्व (Emergency Storage Buffer) बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य किसी भी वैश्विक संकट, युद्ध या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

क्यों बना यह प्लान?

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी थी। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि भविष्य में यह मार्ग बंद होता है या यहां आवाजाही प्रभावित होती है, तो एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

क्या होगा 30 दिन का LPG रिजर्व?

सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े स्टोरेज टर्मिनल विकसित करने की योजना बना रही है, जहां करीब 30 दिनों की एलपीजी जरूरत के बराबर गैस का भंडारण किया जा सके। इससे आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

  • वैश्विक संकट के दौरान भी एलपीजी की उपलब्धता बनी रहेगी।
  • सप्लाई चेन बाधित होने पर भी घरेलू गैस वितरण प्रभावित नहीं होगा।
  • कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के असर को सीमित करने में मदद मिलेगी।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता से जुड़े जोखिम कम होंगे।

भारत के लिए क्यों है जरूरी?

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की उथल-पुथल का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। रणनीतिक एलपीजी भंडार तैयार होने से भारत आपातकालीन परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपट सकेगा और करोड़ों परिवारों तक रसोई गैस की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रखी जा सकेगी।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे भारत ने कच्चे तेल के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए हैं, उसी तरह एलपीजी का इमरजेंसी स्टोरेज भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम साबित हो सकता है।

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