आज के डिजिटल दौर में अधिकांश लोग दिन की शुरुआत मोबाइल फोन से करते हैं। आंख खुलते ही सोशल मीडिया, न्यूज फीड या वीडियो प्लेटफॉर्म पर लगातार स्क्रोल करना कई लोगों की आदत बन चुका है। इसी आदत को ‘डूम स्क्रोलिंग’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार मानसिक स्वास्थ्य, नींद और दैनिक उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
क्या है डूम स्क्रोलिंग?
डूम स्क्रोलिंग वह स्थिति है, जब कोई व्यक्ति लगातार नकारात्मक, चिंताजनक या तनाव पैदा करने वाली खबरों, पोस्ट और वीडियो को बिना रुके देखता रहता है। व्यक्ति को पता होता है कि यह सामग्री उसे परेशान कर रही है, लेकिन फिर भी वह स्क्रोल करना बंद नहीं कर पाता। सोशल मीडिया और 24 घंटे उपलब्ध ऑनलाइन कंटेंट ने इस आदत को और बढ़ावा दिया है।
सुबह की थकान और तनाव से क्या है संबंध?
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठते ही नकारात्मक खबरें या तनावपूर्ण सामग्री देखने से मस्तिष्क अलर्ट मोड में चला जाता है। इससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है और व्यक्ति दिन की शुरुआत ही चिंता या बेचैनी के साथ कर सकता है। यही कारण है कि पर्याप्त नींद लेने के बावजूद कई लोगों को सुबह थकान, चिड़चिड़ापन या मानसिक दबाव महसूस होता है।
डूम स्क्रोलिंग के नुकसान
- तनाव और चिंता का स्तर बढ़ सकता है।
- ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
- मानसिक थकान और भावनात्मक बोझ बढ़ सकता है।
- उत्पादकता और कार्यक्षमता में कमी आ सकती है।
कैसे पहचानें कि आप डूम स्क्रोलिंग कर रहे हैं?
यदि आप बार-बार सोशल मीडिया या न्यूज ऐप खोलते हैं, नकारात्मक खबरों पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं, या स्क्रोलिंग के बाद खुद को अधिक तनावग्रस्त महसूस करते हैं, तो यह डूम स्क्रोलिंग का संकेत हो सकता है।
इससे बचने के उपाय
- सुबह उठते ही तुरंत फोन देखने से बचें।
- सोशल मीडिया और न्यूज ऐप के उपयोग के लिए समय सीमा तय करें।
- दिन की शुरुआत व्यायाम, ध्यान या सकारात्मक गतिविधियों से करें।
- सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें।
- केवल विश्वसनीय और जरूरी खबरों पर ध्यान दें।
क्यों जरूरी है सावधानी?
डूम स्क्रोलिंग कोई आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकती है। लगातार नकारात्मक जानकारी के संपर्क में रहने से तनाव और चिंता बढ़ सकती है। इसलिए डिजिटल दुनिया का संतुलित उपयोग करना और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
यदि आपको लगता है कि लगातार स्क्रोलिंग आपकी नींद, मूड या दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, तो अपनी डिजिटल आदतों की समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
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