आज बंगाल में पेश हो सकता है UCC विधेयक, क्या है इसका इतिहास और लागू होने पर क्या बदलेगा?


 पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। यह राज्य सरकार के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था और अब इसे लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह विधेयक विधानसभा से पारित होता है, तो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानून लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है कि देश या राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानून लागू हो। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लोगों पर अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होते हैं। UCC का उद्देश्य इन अलग-अलग कानूनों की जगह एक समान नागरिक व्यवस्था लागू करना है।

UCC का इतिहास क्या है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड की अवधारणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित है। यह राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा। हालांकि, यह अनुच्छेद बाध्यकारी नहीं है, इसलिए अब तक पूरे देश में UCC लागू नहीं हो सका है।

पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों ने UCC लागू करने या उसके लिए कानून बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। अब पश्चिम बंगाल भी इसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

UCC लागू होने से क्या बदलेगा?

यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

  • विवाह और तलाक के लिए सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू होंगे।
  • उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून समाप्त हो सकते हैं।
  • गोद लेने और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
  • महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों में कानूनी समानता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
  • हालांकि, राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों (ST) को प्राप्त विशेष संरक्षण और उनके पारंपरिक अधिकारों को यथावत रखा जा सकता है।

क्यों है यह मुद्दा चर्चा में?

UCC लंबे समय से देश के सबसे चर्चित संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा है। समर्थकों का मानना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित होंगे और कानून में एकरूपता आएगी। वहीं, विरोधियों का कहना है कि इससे विभिन्न धार्मिक समुदायों की परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों पर असर पड़ सकता है।

अगर पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज यह विधेयक पेश होता है, तो इस पर व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस होने की संभावना है। साथ ही, देश में UCC को लेकर चल रही चर्चा को भी नई दिशा मिल सकती है।

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