मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram एक बार फिर चर्चा में है। दुनिया भर में करोड़ों यूजर्स वाला यह ऐप अपनी प्राइवेसी, बड़े ग्रुप्स और चैनल फीचर्स के लिए लोकप्रिय है, लेकिन यही विशेषताएं कई देशों की सरकारों के लिए चिंता का कारण भी बनी हैं। पिछले कुछ वर्षों में कम से कम नौ देशों ने सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों को लेकर Telegram पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं।
Telegram पर सरकारों की आपत्ति क्यों?
Telegram खुद को एक सुरक्षित और गोपनीय संचार मंच के रूप में प्रस्तुत करता है। ऐप में बड़े समूह, सार्वजनिक चैनल और एन्क्रिप्टेड चैट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। आलोचकों का कहना है कि इन सुविधाओं का उपयोग गलत सूचनाएं फैलाने, अवैध गतिविधियों के समन्वय, कट्टरपंथी प्रचार और आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के लिए भी किया जा सकता है।
कई सरकारों का आरोप रहा है कि Telegram पर मौजूद कुछ चैनल और समूह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहते हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा फेक न्यूज, हिंसा भड़काने वाली सामग्री और परीक्षा पत्र लीक जैसे मामलों में भी समय-समय पर इस प्लेटफॉर्म का नाम सामने आता रहा है।
किन देशों ने लगाया प्रतिबंध?
विभिन्न समय पर Russia, China, Iran, Pakistan, Thailand, Indonesia, Cuba, Belarus और Norway सहित कई देशों में Telegram पर पूर्ण या सीमित प्रतिबंध, ब्लॉकिंग या नियंत्रणात्मक कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन देशों में प्रतिबंधों की प्रकृति और अवधि अलग-अलग रही है।
Telegram का पक्ष क्या है?
Telegram Official Website का कहना है कि वह उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और प्लेटफॉर्म पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करता है। कंपनी का दावा है कि वह आतंकवाद, बाल शोषण और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए लगातार काम करती है।
आगे की चुनौती
डिजिटल युग में सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन बनाने की है। एक ओर नागरिकों की प्राइवेसी का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी। Telegram को लेकर जारी विवाद इसी बहस का हिस्सा है।
यही वजह है कि Telegram केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि डिजिटल स्वतंत्रता, डेटा सुरक्षा और सरकारी निगरानी के बीच चल रही वैश्विक बहस का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
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