Supreme Court: कौन हैं जस्टिस वी मोहना? वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनकर रचा इतिहास


 केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 32 से बढ़कर 37 हो गई है। इसी नियुक्ति प्रक्रिया में V Mohana को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ उन्होंने एक महत्वपूर्ण इतिहास रच दिया है, क्योंकि वह उन चुनिंदा व्यक्तियों में शामिल हो गई हैं जिन्हें वकालत से सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया है।

भारतीय संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए किसी व्यक्ति का हाई कोर्ट का न्यायाधीश होना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक प्रतिष्ठित अधिवक्ता के रूप में कार्य कर चुका है और उसके पास पर्याप्त कानूनी अनुभव है, तो उसे सीधे सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है। जस्टिस वी मोहना की नियुक्ति इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत हुई है।

जस्टिस वी मोहना लंबे समय से कानूनी क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और संवैधानिक, नागरिक तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में उन्होंने न्यायपालिका और विधि क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कानूनी समझ, अनुभव और पेशेवर उपलब्धियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश की थी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीधे बार (वकालत) से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां न्यायपालिका में विविध अनुभव लाने का काम करती हैं। इससे अदालत को ऐसे न्यायाधीश मिलते हैं, जिन्होंने वर्षों तक विभिन्न अदालतों में वकालत करते हुए कानून के व्यावहारिक पहलुओं को करीब से देखा होता है।

जस्टिस वी मोहना की नियुक्ति को भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति न केवल कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उत्कृष्ट वकालत और कानूनी योगदान के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा जा सकता है।

अब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की बढ़ी हुई संख्या से लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, जस्टिस वी मोहना की नियुक्ति न्यायिक इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में दर्ज की जाएगी।

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