SIR विवाद: 23 दलों और 1 निर्दलीय सांसद ने CJI को लिखा पत्र, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाए सवाल


 बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संयुक्त पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

इस संयुक्त पत्र की जानकारी कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों का मानना है कि एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है। पत्र में मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया गया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका निष्पक्ष, पारदर्शी और संविधान के अनुरूप होना चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और इस वजह से मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश से अपील की है कि इस मामले में न्यायिक निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।

जयराम रमेश ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है और किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है।

अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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