प्रधानमंत्री Narendra Modi ने केंद्र की सत्ता में 12 साल पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार चुने गए प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। मई 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने कई बड़े आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों को लागू किया, जिनका असर देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचा।
प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद अगस्त 2014 में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना था। जीरो बैलेंस पर बैंक खाते खोलने की सुविधा ने करोड़ों लोगों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा।
इसके बाद सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना था। इस पहल के जरिए घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (GST) देश के सबसे बड़े कर सुधारों में से एक माना जाता है। जीएसटी ने विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की व्यवस्था लागू की। सरकार का दावा है कि इससे कर प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी बनी।
कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाना था। इसके तहत उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाएं भी शुरू की गईं।
मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया। देशभर में एक्सप्रेसवे, रेलवे नेटवर्क, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के विस्तार के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गईं। वहीं, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं को भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
12 वर्षों के इस कार्यकाल में मोदी सरकार ने आर्थिक सुधार, डिजिटल बदलाव, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास को अपनी प्राथमिकताओं में रखा। समर्थक इसे परिवर्तनकारी दौर मानते हैं, जबकि आलोचक कुछ नीतियों और उनके प्रभावों पर सवाल भी उठाते रहे हैं। इसके बावजूद मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में अपनी जगह बनाए हुए हैं।
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