मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए दुनिया भर में नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में Paris में एक अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां एंग्जाइटी और डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की थेरेपी के लिए गधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 'एनिमल-असिस्टेड थेरेपी' के इस मॉडल में गधे मरीजों के लिए एक तरह के "हैप्पीनेस थेरेपिस्ट" की भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों के साथ समय बिताने से तनाव कम हो सकता है, अकेलेपन की भावना घट सकती है और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ सकता है। इसी विचार के आधार पर कुछ थेरेपी केंद्रों में मरीजों को गधों के साथ समय बिताने, उन्हें खाना खिलाने, टहलाने और उनकी देखभाल करने जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
कैसे मिलती है राहत?
गधे स्वभाव से शांत, धैर्यवान और मिलनसार माने जाते हैं। थेरेपी के दौरान मरीज जब उनके साथ समय बिताते हैं, तो उनका ध्यान नकारात्मक विचारों से हटकर वर्तमान क्षण पर केंद्रित होता है। इससे तनाव और चिंता के स्तर में कमी महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी गतिविधियां:
- तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।
- सामाजिक जुड़ाव बढ़ा सकती हैं।
- आत्मविश्वास में सुधार ला सकती हैं।
- भावनात्मक संतुलन बनाने में सहायक हो सकती हैं।
दुनियाभर में बढ़ रही लोकप्रियता
पशु-सहायता प्राप्त थेरेपी (Animal-Assisted Therapy) कोई नया विचार नहीं है। कई देशों में कुत्तों, घोड़ों और अन्य जानवरों की मदद से थेरेपी कार्यक्रम चलाए जाते हैं। अब गधों को भी इस क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है और कई मरीजों ने इसके सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं।
दवा का विकल्प नहीं
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसी थेरेपी पारंपरिक इलाज, दवाओं या मनोवैज्ञानिक परामर्श का विकल्प नहीं है। इसे एक सहायक (complementary) उपाय के रूप में देखा जाता है, जो उपचार प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच गधों के जरिए दी जा रही यह अनोखी थेरेपी दुनिया भर में चर्चा बटोर रही है। कई लोगों के लिए यह तनाव और अवसाद से निपटने का एक नया और सकारात्मक अनुभव साबित हो रहा है।
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