अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित समझौते की दिशा में बढ़ती प्रगति के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे या प्रतीक्षा कर रहे 34 भारतीय जहाजों के जल्द सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG), उर्वरक कच्चा माल और अन्य आवश्यक ऊर्जा संसाधन लेकर आने वाले जहाज शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों में से एक है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या अवरोध तेल और गैस की आपूर्ति पर सीधा असर डालता है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे भारत सहित कई देशों की चिंताएं बढ़ गई थीं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। एलएनजी की नियमित आपूर्ति बिजली उत्पादन, उद्योगों और शहरों की गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा उर्वरक उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति भी इसी समुद्री मार्ग से होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो उर्वरक उत्पादन पर पड़ने वाला संभावित दबाव कम होगा। इसका सीधा फायदा कृषि क्षेत्र को मिल सकता है, क्योंकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने में आसानी होगी। करोड़ों किसानों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि होर्मुज मार्ग पर स्थिरता लौटने से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम होगा और घरेलू बाजार में ऊर्जा आपूर्ति सुचारु बनी रह सकेगी।
सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि क्षेत्र में शांति बनी रहती है और समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य हो जाता है, तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक उपलब्धता और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय राहत मिलने की संभावना है। ऐसे में अमेरिका-ईरान समझौते की दिशा में बढ़ते कदम भारत के आर्थिक और कृषि हितों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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