दक्षिण भारत के Kerala में इन दिनों संक्रामक बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। शिगेला संक्रमण के मामलों के बीच अब वेस्ट नाइल वायरस के खतरे ने भी लोगों और स्वास्थ्य अधिकारियों की सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों बीमारियां अलग-अलग कारणों से फैलती हैं, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
क्या है शिगेला संक्रमण?
Shigellosis एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो Shigella नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से दूषित भोजन, गंदे पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। संक्रमण होने पर दस्त, पेट दर्द, बुखार और कभी-कभी खूनी दस्त जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, खराब स्वच्छता और दूषित खाद्य पदार्थ इसके प्रसार का प्रमुख कारण बन सकते हैं। बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।
क्या है वेस्ट नाइल वायरस?
West Nile fever एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। अधिकांश संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन कुछ मामलों में बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान और त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं।
गंभीर मामलों में यह संक्रमण मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं पैदा होने का जोखिम बढ़ जाता है। बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में गंभीर संक्रमण की संभावना अधिक मानी जाती है।
क्यों बढ़ी स्वास्थ्य विभाग की चिंता?
एक ओर शिगेला दूषित पानी और भोजन के जरिए फैल रहा है, वहीं दूसरी ओर वेस्ट नाइल वायरस मच्छरों के माध्यम से संक्रमण फैला सकता है। अलग-अलग स्रोतों से फैलने वाली इन बीमारियों के एक साथ सामने आने से स्वास्थ्य विभाग को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
बचाव के लिए क्या करें?
- साफ और उबला हुआ पानी पीएं।
- भोजन को स्वच्छ तरीके से तैयार और संग्रहित करें।
- बार-बार हाथ धोने की आदत अपनाएं।
- मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छर नियंत्रण उपायों के जरिए इन दोनों बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि तेज बुखार, लगातार दस्त या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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