भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को कहा कि यह समझौता लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक पहल है और इससे क्षेत्र में शांति बहाल होने की उम्मीद बढ़ी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति से न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव में भी राहत मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के साथ-साथ समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और व्यापार को भी सुनिश्चित करेगा।
हालांकि प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे शेष हैं, जिन पर आगे बातचीत की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि सभी लंबित मामलों पर संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसा समाधान निकलेगा जो टिकाऊ, व्यापक और अंतिम हो।
भारत लंबे समय से यह रुख अपनाता रहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से होना चाहिए। हाल के महीनों में भी प्रधानमंत्री मोदी कई अवसरों पर यह दोहरा चुके हैं कि युद्ध और संघर्ष किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते तथा संवाद ही शांति का सबसे प्रभावी मार्ग है।
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने हाल ही में संघर्ष समाप्त करने के लिए एक शांति ढांचे पर सहमति बनाई है। इस समझौते के तहत क्षेत्र में तनाव कम करने, समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाने और आगे के विवादित मुद्दों पर वार्ता जारी रखने का रास्ता खुला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देशों और संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।
भारत का मानना है कि यदि दोनों पक्ष शेष मुद्दों पर भी सकारात्मक संवाद बनाए रखते हैं, तो यह समझौता पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता की मजबूत नींव साबित हो सकता है।

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