गूगल ने अपनी AI सेवाओं से जुड़ी प्राइवेसी और डेटा उपयोग नीति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत, यदि यूजर कुछ AI फीचर्स का इस्तेमाल करते हैं, तो उनकी आवाज (Voice), फोटो, वीडियो और अन्य इनपुट का उपयोग AI मॉडल को बेहतर बनाने और ट्रेनिंग के लिए किया जा सकता है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह प्रक्रिया तय शर्तों और प्राइवेसी सुरक्षा उपायों के तहत होती है।
कंपनी के अनुसार, AI मॉडल की सटीकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कुछ यूजर इंटरैक्शन की समीक्षा की जा सकती है। इसमें वॉइस कमांड, इमेज, वीडियो या टेक्स्ट इनपुट शामिल हो सकते हैं। गूगल का कहना है कि सभी डेटा का उपयोग उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और संबंधित सेवाओं की शर्तों के अनुरूप किया जाता है।
किन यूजर्स पर लागू हो सकते हैं ये नियम?
यह बदलाव मुख्य रूप से उन यूजर्स पर लागू होता है जो Google की AI आधारित सेवाओं, जैसे Gemini, Google AI फीचर्स या अन्य जनरेटिव AI टूल्स का उपयोग करते हैं। हर सेवा की अपनी अलग डेटा नीति हो सकती है, इसलिए किसी भी AI फीचर का इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्राइवेसी सेटिंग्स और शर्तों को पढ़ना जरूरी है।
खुद को कैसे रखें सुरक्षित?
यदि आप नहीं चाहते कि आपका डेटा AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो, तो कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं—
- Google Account की Privacy और Activity Controls सेटिंग्स की नियमित समीक्षा करें।
- Web & App Activity और Voice & Audio Activity जैसी सेटिंग्स को अपनी जरूरत के अनुसार ऑन या ऑफ करें।
- संवेदनशील दस्तावेज, निजी फोटो, गोपनीय वीडियो या व्यक्तिगत जानकारी AI चैटबॉट्स और AI टूल्स पर साझा करने से बचें।
- समय-समय पर अपने Google अकाउंट की My Activity हिस्ट्री की जांच करें और जरूरत पड़ने पर उसे डिलीट करें।
- केवल उन्हीं AI फीचर्स का उपयोग करें, जिनकी डेटा उपयोग नीति को आप समझते हों।
क्या घबराने की जरूरत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि AI सेवाओं का उपयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात जागरूकता है। अधिकांश बड़ी टेक कंपनियां यूजर्स को डेटा कंट्रोल और प्राइवेसी सेटिंग्स का विकल्प देती हैं। इसलिए किसी भी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ना, आवश्यक सेटिंग्स बदलना और निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतना सबसे बेहतर तरीका है।
AI तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और इसके साथ डेटा सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में यूजर्स को समय-समय पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करते रहना चाहिए, ताकि उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर उनका नियंत्रण बना रहे।
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