रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग, FY26 में रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा


 भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है और भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा उत्पादन में यह वृद्धि सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को मिल रही सफलता का संकेत है। बीते कुछ वर्षों में स्वदेशी रक्षा उपकरणों, हथियार प्रणालियों, सैन्य वाहनों और अत्याधुनिक तकनीकों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की रक्षा उत्पादन क्षमता, नवाचार और घरेलू उद्योगों की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण बताया। उनके अनुसार, स्वदेशी रक्षा निर्माण में बढ़ोतरी से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी से भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक रक्षा बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हाल के वर्षों में कई रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म्स का स्वदेशी विकास किया गया है, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है।

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं। इसके अलावा रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों का असर उत्पादन और निर्यात दोनों क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।

रक्षा उत्पादन का 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना भारत के लिए केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश की रणनीतिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण और निर्यात दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

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