उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सीवेज के नमूनों में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV1) मिलने की खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत को पोलियो मुक्त घोषित हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पोलियो दोबारा लौट रहा है और क्या देश की वर्षों की मेहनत पर खतरा मंडरा रहा है?
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में गाजियाबाद के सीवेज सैंपल की जांच के दौरान वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 के अंश पाए गए। यह खोज पर्यावरण निगरानी (Environmental Surveillance) के दौरान हुई, जिसमें सीवेज के नमूनों की जांच कर वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
हालांकि, अब तक किसी बच्चे में पोलियो संक्रमण या पोलियो से होने वाले लकवे (Paralysis) का मामला सामने नहीं आया है। इसलिए विशेषज्ञ लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
भारत कब हुआ था पोलियो मुक्त?
भारत में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार तीन वर्षों तक कोई नया मामला सामने नहीं आया और वर्ष 2014 में World Health Organization ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया।
यह उपलब्धि देश के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक मानी जाती है, जिसमें करोड़ों बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई थी।
वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस क्या होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस और जंगली (Wild) पोलियोवायरस में अंतर होता है। ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) में कमजोर वायरस का उपयोग किया जाता है। बहुत दुर्लभ परिस्थितियों में यह वायरस लंबे समय तक कम टीकाकरण वाले समुदायों में घूमते हुए बदल सकता है और वैक्सीन-डिराइव्ड वायरस का रूप ले सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि पोलियो बीमारी बड़े पैमाने पर लौट आई है, बल्कि यह टीकाकरण कवरेज को मजबूत बनाए रखने की चेतावनी माना जाता है।
क्या भारत में फिर फैल सकता है पोलियो?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बच्चों का नियमित टीकाकरण जारी है, तब तक बड़े प्रकोप की संभावना बेहद कम रहती है। भारत में पोलियो निगरानी प्रणाली और टीकाकरण नेटवर्क दुनिया के सबसे मजबूत कार्यक्रमों में गिने जाते हैं।
हालांकि यदि किसी क्षेत्र में टीकाकरण का स्तर गिरता है, तो संक्रमण के फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे संकेतों को गंभीरता से लेता है।
लोगों को क्या करना चाहिए?
- बच्चों का नियमित टीकाकरण समय पर कराएं।
- पोलियो अभियान के दौरान दी जाने वाली अतिरिक्त खुराक जरूर दिलाएं।
- अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचें।
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
क्या घबराने की जरूरत है?
फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। सीवेज में वायरस का मिलना निगरानी तंत्र की सफलता भी दर्शाता है, क्योंकि इससे किसी संभावित खतरे का समय रहते पता चल जाता है।
भारत ने पोलियो के खिलाफ लंबी और कठिन लड़ाई जीतकर दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया है। अब सबसे बड़ी चुनौती इस उपलब्धि को कायम रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह जाए। तभी पोलियो-मुक्त भारत का सपना सुरक्षित रह सकेगा।
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