भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून के इतिहास में शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। पहली बार अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर नौ महिला कैडेट्स भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। पासिंग आउट परेड के दौरान इन महिला कैडेट्स को औपचारिक रूप से कमीशन प्रदान किया गया, जिसके साथ ही वे भारतीय सेना का अभिन्न हिस्सा बन गईं।
यह उपलब्धि केवल आईएमए के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलती भूमिका का भी प्रतीक मानी जा रही है। अब तक आईएमए से केवल पुरुष कैडेट्स ही पासआउट होते रहे थे, लेकिन इस ऐतिहासिक अवसर ने सैन्य परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने ली परेड की सलामी
भव्य पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu ने सलामी ली। इस दौरान उन्होंने नवप्रशिक्षित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि महिला कैडेट्स का आईएमए से कमीशन प्राप्त करना बदलते भारत और महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और सशस्त्र बल भी इससे अछूते नहीं हैं। उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
अनुशासन, साहस और समर्पण का प्रदर्शन
परेड के दौरान कैडेट्स की शानदार कदमताल, अनुशासन और सैन्य कौशल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। 'अंतिम पग' पार करते ही कैडेट्स प्रशिक्षणार्थी से सैन्य अधिकारी बन गए। परेड मैदान में मौजूद परिजनों और अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक क्षण का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
महिलाओं के लिए खुल रहे नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमए से महिला अधिकारियों का कमीशन मिलना भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं को स्थायी कमीशन, सैन्य पुलिस और विभिन्न लड़ाकू भूमिकाओं में अवसर दिए गए हैं। अब आईएमए से सीधे महिला अधिकारियों का पासआउट होना इस परिवर्तन को और मजबूत करता है।
देहरादून की इस ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड ने यह संदेश दिया है कि भारतीय सेना में योग्यता, समर्पण और नेतृत्व क्षमता ही सफलता की असली पहचान है, चाहे वह पुरुष हो या महिला।
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