भारत में नागरिकता का मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनता रहा है। हालांकि, अब आवश्यकता इस बात की है कि इस विषय को विवाद या टकराव के बजाय संस्थागत सुधार के नजरिए से देखा जाए। नागरिकता से जुड़े प्रश्नों का स्थायी समाधान केवल कानूनों के जरिए नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत और भरोसेमंद अभिलेखीय व्यवस्था विकसित करके संभव है, जिसमें हर नागरिक की पहचान और दस्तावेजों का रिकॉर्ड स्पष्ट, सुरक्षित और आसानी से सत्यापित किया जा सके।
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