फिनलैंड में आयोजित कुल्तारांता वार्ता के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूरोप की सुरक्षा और हथियार नीति को लेकर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा को खतरा नहीं पहुंचाया है, लेकिन लंबे समय से यूरोप में बने हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते रहे हैं।
जयशंकर का यह बयान उस समय आया जब वैश्विक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर चर्चा चल रही थी। उन्होंने यूरोपीय देशों को याद दिलाया कि भारत हमेशा एक जिम्मेदार और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करता रहा है। इसके बावजूद भारत को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, जहां यूरोप में निर्मित हथियार उसके खिलाफ इस्तेमाल किए गए।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं। हालांकि, सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर यूरोप को भारत की चिंताओं को भी गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने कभी यूरोप की संप्रभुता या सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा नहीं किया, इसलिए दोनों पक्षों के बीच संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।
जयशंकर ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां विभिन्न देशों की सुरक्षा चिंताओं और हितों का समान रूप से सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मानदंडों से बचना चाहिए और सभी देशों के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को लेकर स्पष्ट संदेश देने पर जोर दिया जाता है। हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखी है और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
कुल्तारांता वार्ता में दिया गया जयशंकर का यह बयान भारत की विदेश नीति के आत्मविश्वास और स्पष्टता को दर्शाता है। उनके इस संदेश को यूरोप के लिए एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं और राष्ट्रीय हितों के मुद्दे पर किसी भी मंच पर बेबाकी से अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगा।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ