वीजा देरी पर अमेरिकी सांसद की चिंता, डॉक्टरों की कमी बढ़ने का खतरा; भारतीय चिकित्सकों पर पड़ सकता है बड़ा असर


 अमेरिका में डॉक्टरों की बढ़ती कमी को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इसी बीच एक अमेरिकी सांसद ने चेतावनी दी है कि वीजा प्रक्रियाओं में हो रही देरी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर डाल सकती है। उनका कहना है कि विदेशी डॉक्टरों के अमेरिका पहुंचने में बाधाएं पैदा होने से खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में चिकित्सकों की कमी और बढ़ सकती है।

इस चिंता के केंद्र में जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम है, जो लंबे समय से विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका के उन क्षेत्रों में काम करने का अवसर देता रहा है जहां डॉक्टरों की भारी कमी है। इस कार्यक्रम के तहत डॉक्टर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अमेरिका में रहकर सेवा दे सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित अवधि तक जरूरतमंद क्षेत्रों में काम करें।

अमेरिका के कई ग्रामीण अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक चिकित्सा, आंतरिक रोग, बाल चिकित्सा तथा अन्य विशेषज्ञ सेवाओं के लिए विदेशी डॉक्टरों पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में वीजा जारी होने में देरी या प्रशासनिक अड़चनें इन संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

इस मुद्दे का सबसे अधिक असर भारतीय डॉक्टरों पर पड़ने की संभावना है। अमेरिका में कार्यरत विदेशी चिकित्सकों के बड़े समूहों में भारतीय मूल के डॉक्टर प्रमुख हैं। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स और विशेषज्ञ डॉक्टर जे-1 वीजा कार्यक्रम के माध्यम से अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। यदि वीजा प्रक्रिया धीमी पड़ती है, तो अमेरिका में नौकरी की तैयारी कर रहे भारतीय डॉक्टरों की नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे केवल डॉक्टरों के करियर पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि मरीजों को भी समय पर चिकित्सा सेवाएं मिलने में दिक्कत हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही चिकित्सकों की भारी कमी है, वहां स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अमेरिकी सांसदों ने प्रशासन से वीजा मामलों के तेजी से निपटारे की मांग की है ताकि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहे। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिकी सरकार के फैसले पर भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हजारों पेशेवरों की नजरें टिकी रहेंगी।

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