पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक ओर अमेरिका, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के हित आपस में टकरा रहे हैं, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय शक्तियां अपने-अपने रणनीतिक लक्ष्य साधने में जुटी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गल्फ की इस जटिल बाजी का असली खिलाड़ी कौन है और क्या क्षेत्र का कोई ‘महाबली’ अपने ही बनाए जाल में फंसता नजर आ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन केवल सैन्य ताकत से तय नहीं होता, बल्कि ऊर्जा संसाधनों, समुद्री व्यापार मार्गों, कूटनीतिक गठबंधनों और आर्थिक प्रभाव का भी इसमें बड़ा योगदान है। Iran, Saudi Arabia, Israel और United States इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख किरदार बने हुए हैं।
विशेष रूप से Strait of Hormuz को लेकर बढ़ी चिंता ने वैश्विक बाजारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यदि यहां किसी प्रकार का व्यवधान पैदा होता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान संकट में कोई भी पक्ष खुली और लंबी जंग नहीं चाहता, लेकिन रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी कारण कूटनीति, सैन्य शक्ति और आर्थिक प्रभाव का खेल एक साथ चल रहा है। ऐसे माहौल में यह तय करना मुश्किल है कि असली बढ़त किसके पास है, क्योंकि हर खिलाड़ी अपने हितों की रक्षा के लिए अलग-अलग मोर्चों पर सक्रिय है।
फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक तथा सैन्य घटनाक्रम यह तय करेंगे कि इस शक्ति संघर्ष में कौन बढ़त हासिल करता है और कौन दबाव में आता है।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ